जीवन कौशल क्या है , What Is Life Skills In Hindi english Who Developed Basic Life Skills Curriculum? - UNICEFWhat are life skills and why teach them? |
जीवन कौशल क्या है , what is life skills in hindi
जीवन कौशल क्या है , what is life skills in hindi
आग्रहिता- आग्रहिता एक ऐसा व्यवहार या कौशल है जो हमारी भावनाओं, आवश्यकताओं, इच्छाओं तथा विचारों के सुस्पष्ट तथा विश्वासपूर्ण सम्प्रेषण में सहायक होता है। यह ऐसी योग्यता है जिसके द्वारा किसी के निवेदन को अस्वीकार करना, किसी विषय पर बिना आत्मचेतन के अपने मत को अभिव्यक्त करना, या फिर खुल कर ऐसे संगवेगों जैसे- प्रेम, क्रोध इत्यादि को अभिव्यक्त करना सम्भव होता है। यदि आप आग्रही हैं तो आप में उच्च आत्म विश्वास एवं आत्म-सम्मान तथा अपनी अस्मिता की एक अटूट भावना होती है।
समय प्रबन्धन- व्यक्ति अपना समय जैसे व्यतीत करते हैं वह अपने जीवन की गुणवत्ता को निर्धारित करता है। समय का प्रबन्धन तथा प्रत्यायोजित करना सीखने से, दबाव मुक्त होने में सहायता मिल सकती है। समय दबाव कम करने का एक प्रमुख तरीका, समय के प्रत्यक्षण में परिवर्तन लाना है। समय प्रबन्धन का प्रमुख नियम यह है कि आप जिन कार्यों को महत्त्व देते हैं उनका परिपालन करने में समय लगाएँ या उन कार्यों को करने में जो आपके लक्ष्य प्राप्ति में सहायक हों। आपको अपनी जानकारियों की वास्तविकताओं का पता हो, तथा कार्य को समय पर करें। यह स्पष्ट होना चाहिए कि आप क्या करना चाहते हैं तथा आप अपने जीवन में इन दोनों बातों में सामंजस्य स्थापित कर सके, इन पर समय प्रबन्ध निर्भर करता है।
स्वयं की देखभाल- यदि व्यक्ति स्वयं को स्वस्थ, दुरुस्त तथा विश्रांत रखते हैं तो हम दैनिक जीवन के दबावों का सामना करने के लिए शारीरिक एवं सांवेगिक रूप से और अच्छी तरह तैयार रहते हैं। हमारे श्वसन का प्रतिरूप हमारी मानसिक तथा सांवेगिक स्थिति को परिलक्षित करता है। जब हम दबाव में होते हैं तो हमारा श्वसन और तेज हो जाता है, जिसके बीच-बीच में अक्सर आहें भी निकलती रहती हैं। सबसे अधिक विश्रांत श्वसन मन्द, मध्यपट या डायाफ्राम, अर्थात् सीना और उदर गुहिका के बीच एवं गुम्बदाकार पेशी, से उदर-केन्द्रित श्वसन होता है। पर्यावरणी दबाव, जैसे- शोर, प्रदूषण, दिक, प्रकाश, वर्ण इत्यादि सब हमारी मनोस्थिति को प्रभावित कर सकते हैं। इनका निश्चित प्रभाव तनाव का सामना करने की हमारी क्षमता तथा कुशल-क्षेम पर पड़ता है।
आहार- संतुलित आहार व्यक्ति की मनःस्थिति को ठीक कर सकता है, ऊर्जा प्रदान कर सकता है, पेशियों का पोषण कर सकता है, परिसंचरण को समुन्नत कर सकता है, रोगों से रक्षा कर सकता है, प्रतिरक्षक तन्त्र को सशक्त बना सकता है तथा व्यक्ति को अधिक अच्छा अनुभव करा सकता है जिससे वह जीवन में दबावों का सामना और अच्छी तरह से कर सके। स्वास्थ्यकर जीवन की कुंजी है, दिन में तीन बार संतुलित आहार का सेवन करना। किसी व्यक्ति को कितने पोषण की आवश्यकता है, यह व्यक्ति की सक्रियता स्तर, आनुवंशिक प्रकृति, जलवायु तथा स्वास्थ्य के इतिहास पर निर्भर करता है। कोई व्यक्ति क्या भोजन करता है तथा उसका वजन कितना हैं, इसमें व्यवहारात्मक प्रक्रियाएँ निहित होती हैं। कुछ व्यक्ति पौष्टिक आहार तथा वजन का रख-रखाव सफलतापूर्वक कर पाते हैं किन्तु कुछ अन्य व्यक्ति मोटापे के शिकार हो जाते हैं। जब हम दबावग्रस्त होते हैं तो हम ‘आराम देने वाले भोजन’ जिनमें प्रायः अधिक वसा, नमक तथा चीनी होती है, का सेवन करना चाहते हैं ।
व्यायाम – बड़ी संख्या में किए गए अध्ययन शारीरिक स्वस्थता एवं स्वास्थ्य के बीच सुसंगत सकारात्मक सम्बन्धों की पुष्टि करते हैं। इसके अतिरिक्त, कोई व्यक्ति स्वास्थ्य की समुन्नति के लिए जो उपाय कर सकता है उसमें व्यायाम जीवन शैली में वह परिवर्तन है जिसे व्यापक रूप से लोकप्रिय अनुमोदन प्राप्त हैं। नियमित व्यायाम वजन तथा दबाव के प्रबन्धन में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है तथा दबाव, दुश्चिन्ता एवं अवसाद को घटाने में सकारात्मक प्रभाव प्रदर्शित करता है। अच्छे स्वास्थ्य के लिए जो व्यायाम आवश्यक है, उनमें तनन या खिंचाव व्यायाम जैसे- योग के आसन तथा वायुजीबी व्यायाम जैसे- दौड़ना, तैरना, साइकिल चलाना इत्यादि आते हैं। जहाँ खिंचाव वाले व्यायाम शान्तिदायक प्रभाव डालते हैं, वहाँ वायुजीवी व्यायाम शरीर के भाव.. प्रबोधन स्तर को बढ़ाते हैं। व्यायाम के स्वास्थ्य सम्बन्धी फायदे दबाव प्रतिरोधक के रूप में कार्य करते हैं। अध्ययन प्रदर्शित करते हैं कि शारीरिक स्वस्थता, व्यक्तियों को सामान्य मानसिक तथा शारीरिक कुशल-क्षेम का अनुभव कराती है। उस समय भी जब जीवन में नकारात्मक घटनाएँ घट रही हो। जीवन कौशल वो सकारात्मक योग्यता है जो व्यक्ति को रोजमर्रा की जरूरतों तथा कठिनाइयों से जूझने में समर्थ बनाती है। जीवन कौशल हमारी सामाजिक सफलता और लम्बी अवधि की खुशी एवं सुख के लिए आवश्यक है।
जीवन कौशल शिक्षा किसे कहते है ?
जीवन कौशल शिक्षा एक प्रकार का ऐसा कौशल हैं। जिसके अंतर्गत बालक को उचित जीवन निर्वहन करने योग्य एवम जीवन से सम्बंधित क्रिया कलापो को सुव्यवस्थित ढंग से करने की क्षमता विकसित की जाती हैं।
जीवन कौशल की अवधारणा एवं अर्थ – (Meaning and concept of life skill )
जीवन कौशल शिक्षा एक प्रकार की ऐसी शिक्षा हैं। जिसमे बालक को इस प्रकार से दक्ष करना कि वह विषम परिस्थितियों में अपनी योग्यता और बुद्धि के द्वारा समायोजन कर सके। साथ ही साथ मानव जीवन मे ऐसी कुशलाओ को विकसित करना है। जिससे वह एक कुशल नागरिक बन सके।
जीवन कौशल की परिभाषाएं
जीवन कौशल की परिभाषाएं निम्नलिखित हैं।
प्रोफेसर एसके दुबे के अनुसार जीवन कौशल की परिभाषा
“जीवन कौशल का आशय उन दक्षताओं के विकास से है।जो बालक सर्वांगीण विकास में योगदान देती हैं।तथा बालकों को कुशल नागरिक एवं योग्य सामाजिक सदस्य के रूप में विकसित करते हुए उसमें जीवन की विषम परिस्थितियों में समायोजन की योग्यता विकसित करते हैं।”
श्रीमती आर के शर्मा के अनुसार जीवन कौशल की परिभाषा
“जीवन कौशलों का संबंध पूर्ण कुशलताओं की विकास से है। जो कि छात्रों को सामाजिक ,आर्थिक राजनीतिक एवं व्यावहारिक क्षेत्र में सफल बनाती है। तथा उन्हें सर्वांगीण विकास की ओर अग्रसर करती है।जिससे कि बालक का विकास पूर्ण मानव के रूप में हो।”
जीवन कौशलों की विशेषताएं ( Characteristics of life skills)
जीवन कौशल की विशेषताए निम्नलिखित होती हैं।
बालको में व्यवहारिक ज्ञान का समावेश –
इसके अंतर्गत बालकों ऐसी कुशलताओं के बारे में विशेष ज्ञान प्रदान किया जाता है। जिन की आवश्यकता बालकों को आने वाले समय में सामान्य रूप से पड़ती है।जैसे शीघ्र निर्णय लेने की कुशलता एवं आत्मविश्वास संबंधित कुशलता।
जीवन सम्बन्धी दक्षताओं का समावेश –
जीवन कौशल के माध्यम से बालकों में जीवन में सफल होने एवं प्रत्येक क्षेत्र में सफल होने के साथ समायोजित होने की विशेषता का भी विकास किया जाता है।
बालको में सकारात्मक एवम आदर्श व्यवहार का विकास –
जीवन में अनेक ऐसे अवसर आते हैं जिसमें बालक विभिन्न प्रकार की क्रियाओं व्यवस्थाओं के बारे में नकारात्मक धारणा बना करके अपना मनोबल गिरा लेते हैं।परिणाम स्वरूप यह परिस्थिति बालकों को स्वयं को समायोजित करने में बाधा उत्पन्न करती है। इस बाधा से निपटने हेतु बालकों को सकारात्मक सोच एवं व्यवहार की कुशलता प्रदान की जाती है।
आत्म विश्वास से सम्बंध स्थापित करना –
जीवन कौशलों का आत्म तत्व आत्मविश्वास होता है जिसके अभाव में कोई बालक कार्य की योग्यता होते हुए भी कार्य को उचित रूप से संपन्न ने नहीं कर पाता है।इसीलिए जीवन कौशल की शिक्षा द्वारा छात्रों में आत्मविश्वास को भावना को विकसित किया जाता है।
आधुनिकता की विशेषता का समावेश –
आधुनिकता से आशय ऐसी परिस्थितियां व्यवस्थाएं से हैं जो वर्तमान समय में हमारे सामने आने वाली है आता शिक्षक को सदा अपने विचारों के माध्यम में आधुनिकता का भी समावेश करना चाहिए।
विषम परिस्थितियों में समायोजन की आवश्यकता –
विषम परिस्थितियों में समायोजन की योग्यता का कौशल भी जीवन कौशल से संबंधित हैं जीवन कौशल के माध्यम से छात्रों में ऐसी क्षमता विकसित करना है।जिससे कि बालक अपने आप को परिस्थितियों के अनुरूप परिवर्तित कर लेते हैं। या परिस्थितियों को ही परिवर्तित कर लेते हैं।
सर्वांगीण विकास की प्रक्रिया –
सर्वांगीण विकास की प्रक्रिया को भी जीवन का उसने का एक भाग माना जाता है।जीवन को स्नेह के द्वारा छात्रों के लिए सर्वांगीण विकास का मार्ग प्रशस्त होता है।क्योंकि इसमें उनको प्रत्येक क्षेत्र में संबंधित कुशलताये प्रदान की जाती हैं।
जीवन कौशल के प्रकार
जीवन कौशल के दो प्रकार होते हैं।
जिसके अंतर्गत सामान्य जीवन कौशल और उच्चस्तरीय कौशल आते हैं।और इन कौशलों के अंतर्गत अनेक प्रकार के कौशल आते हैं।जो निम्नलिखित हैं।
सामान्य कौशल –
- आत्मविश्वास संबंधी कौशल ।
- निर्णय लेने की क्षमता संबंधी कौशल ।
- तनाव उन्मूलन कौशल ।
- विपरीत परिस्थितियों में समायोजन कौशल ।
- स्वयं के प्रति जागरूकता का कौशल ।
- गलत कार्य के प्रति नकारात्मक प्रवृत्ति का कौशल ।
- सकारात्मक व्यवहार ।
- समालोचनात्मक सोच ।
- एक दूसरे के प्रति समाज का कौशल।
उच्च स्तरीय कौशल
उच्च स्तरीय कौशल के अंतर्गत निम्नलिखित कौशल आते हैं।
- श्रेष्ठ उष्णीयता एवं उच्च मानसिक स्तर।
- सोचने के रास्ते ।
- मानसिक एवं शारीरिक विश्राम ।
- लक्ष्य निर्धारण समस्या समाधान ।
- संप्रेषण ।
- सामाजिक समर्थन ।
- स्वास्थ्य प्रद से जीवन स्तर।
जीवन कौशल के विकास के उद्देश्य (Aims of development of life skills)
जीवन कौशल के विकास के उद्देश्य निम्नलिखित हैं।
- सामाजिक विकास का उद्देश्य।
- प्रयोगात्मक ज्ञान का विकास ।
- समायोजन शक्ति के विकास का उद्देश्य ।
- जीवन मूल्यों के विकास का उद्देश्य ।
- मानसिक विकास का उद्देश्य ।
- सर्वांगीण विकास का उद्देश्य।
- आत्मविश्वास के विकास का उद्देश्य।
जीवन कौशल की आवश्यकता एवम महत्व –
जीवन कौशल की आवश्यकता और महत्व निम्नलिखित हैं
- एक बालक के सर्वांगीण विकास के लिए जीवन कौशलों का ज्ञान देना आवश्यक हो जाता है। क्योंकि जीवन कौशल के माध्यम से उस का सर्वांगीण विकास होता है। अतः जीवन कौशल के अभाव में वह पूर्ण विकास की ओर अग्रसर नहीं हो सकता।
- सामाजिक गुणों के विकास के लिए जीवन कौशल को ज्ञान देना आवश्यक हो जाता है।क्योंकि जीवन कौशल मर्यादित आदर्श एवं सामाजिक व्यवहार में उपयोगी सिद्ध होता है।
- शैक्षिक समस्या एवं अशैक्षिक समस्याओं के समाधान के लिए जीवन कौशलों का विकास होना आवश्यक होता है
- संवेगात्मक स्थिरता एवं मानसिक प्रक्रिया को सरल एवं स्वाभाविक रूप में संपन्न करने के लिए जीवन कौशल की आवश्यकता का अनुभव होना आवश्यक है।
- बालकों में आत्मविश्वास की भावना के विकास के लिए जीवन कौशल की आवश्यकता होती है।
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